Thursday 3 December 2009

बनेगी सबकी बात

सी. नाथॅकोट पाकिॅन्सन, एम के रूसत्मजी ने एस. ए. सप्रे के साथ एक किताब लिखी है। किताब का नाम है. मैनेजमेंट में नए प्रयोग। इसमें मैनेजमेंट के 25 महान विचारकों के अनुभवों का सार है। विचारकों के नाम हैं.एल्टन मेयो, एफ ङब्ल्यू टेलर, मेरी फोलेट, अब्राहम मैसलो, ङग्लस मेक्ग्रेगर, हबॅटॅ सिमोन,थियोङोर लेविट आदि। प्रबंघन से जुङे प्रत्येक व्यक्ित के लिए एक आवश्यक किताब। टाइम्स आफ इंङिया में इस किताब के बारे में लिखा गया है. हर एक्जीक्यूटिव के लिए आवश्यक किताब। घंटों उलझाने वाले प्रश्नों का जवाब मिनटों में मिल जाए। मेरी फोलेट ने इस किताब में लिखा है.यह मैनेजमेंट की जिम्मेदारी है कि वह अपने व्यवसाय को इस तरह संचालित करे कि लोग इसकी गतिविधियों में पूरे मन से भाग लें। किताब में यह भी कहा गया है कि नेता का मुख्य काम जगाना होता है। अथाॅत लोगों के अंदर से उनकी अधिकतम झमता को बाहर निकालना। प्रकाशक है राजपाल और मूल्य है सवा सौ रूपए।

5 comments:

आशेन्द्र सिंह said...

prabandhan ko hum agar bazar se itar karke dekhen to hamare yaha sason ka prabhandhan bhi hota raha hai. aaj kal use yoga ke nam se becha jane laga hai. kitabon ka ghanist sambandh bhavnaon ke sath raha hai ya yah bhi kah sakte hain ki bhavnatmak rup se likhi gayee kitaben hi sahitya men amar ho saki hain . ab agar prabandhan ke siddhanton ko jeevan men apnaya jaye bhi to jivan bahut neeras sa lagta hai. mera mat hai ki anubhavon ke prakash or bhavnaon ki drasti se yadi jeevan ko dekha jaye to behtar nateeje samne aa sakte hain. ye mera manna hai aap isse zarur sahmat hon esa zaruri nahee hai. post ke liye badhai.

harekrishna said...

अगर आप के पास ये किताब है तो शीघ्र मुझे दीजिये. मेरे पास घंटों उलझाने वाले प्रश्नों का खज़ाना है अगर मिनटों में जवाब मिल जाये तो क्या कहने. अपने राम की सबसे बड़ी उलझन तो सवाल ही है.

harekrishna said...

अगर आप के पास ये किताब है तो शीघ्र मुझे दीजिये. मेरे पास घंटों उलझाने वाले प्रश्नों का खज़ाना है अगर मिनटों में जवाब मिल जाये तो क्या कहने. अपने राम की सबसे बड़ी उलझन तो सवाल ही है.

harekrishna said...

अगर आप के पास ये किताब है तो शीघ्र मुझे दीजिये. मेरे पास घंटों उलझाने वाले प्रश्नों का खज़ाना है अगर मिनटों में जवाब मिल जाये तो क्या कहने. अपने राम की सबसे बड़ी उलझन तो सवाल ही है.

चण्डीदत्त शुक्ल said...

वाह भाई, ऐसी क़िताब भी है...जो सबकुछ सुलझा दे. अच्छी जानकारी!